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हमारे माननीय सांसद ,

Posted On: 27 Nov, 2010 Others में

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विश्व में भारत ही एक सबसे बड़ा लोक-तांत्रिक देश है जिसमे जानता के द्वारा चुने हुए 543 प्रतिनिधि ही केंद्रीय सरकार के शासन को चलते है– इसके साथ सबसे बड़ी हास्यापद बात यह है की संसद का सदस्य बनने के लिए किसी भी विशेष योग्यता की आवश्यकता नहीं है केवल 35 वर्ष का व्यस्क भारतीय नागरिक होना जरूरी है किसी शिक्षा की भी जरूरत नहीं है यहाँ तक की अगर अनपढ़ भी हो तो चलेगा ? इन्ही सांसदों में से बहुमत के घटक दल से प्रधान मंत्री का चुनाव होता है और बाकी घटक विपक्ष या समर्थक होता है | सत्ता पक्ष और विपक्ष मिल कर देश को दिशा देने अर्थात विकास के कार्यों पर चर्चा करने के साथ – साथ कानून का राज्य स्थापित करने की नागरिको की भलाई के कार्य करते हैं | संसद भारत की एक सर्वोच्च कानून निमार्ण करने की संस्था है | पर आजकल देखने में यह आ रहा है की माननीय सदस्यों ने संसद को संसद कम एक अखाडा या प्रदर्शन का मंच बना रखा है —- जहाँ जानता की गाढ़ी कमाई का करोडो रुपया प्रतिदिन खर्च हो रहा है वहीँ सरकार और विपक्ष की जोर अजमाईस से पिछले तीन सप्ताह से कोई संसदीय कार्य संपन्न नहीं हो रहा है — क्या यह हमारे माननीय सांसदों का कर्तव्य नहीं है की संसद को प्रदर्शन का मंच न बनाये केवल विधाई कार्यों के लिए ही सुरिक्षित रखे —- दुनिया में ऐसी कौन सी समस्या है जो विचार विमर्श से सुलझाई नहीं जा सकती — यहाँ मैं कम भ्रष्ट और अधिक भ्रष्ट की बात नहीं कर रहा हूँ | इसलिए संसद को ठप्प करके माननीय सांसद भ्रष्टाचार के दानव को उर्जा देने का कार्य ही कर रहें है —-होना तो यह चाहिए की भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए कोई और अधिक स्पष्ट प्रभावी क़ानून को पास करके देश को एक उदहारण दे. रोज रोज का नाटक बंद होना चाहिए —– और अगर नाटक ही करना है तो उसके लिए और बहुत से मंच है संसद भवन को बक्श दें —ऐसा नहीं है की जानता कुछ जानती नहीं है जानता सब कुछ जानती है केवल मौके का इन्तजार करती है यह समझ सभी राजनितिक पार्टियों को होनी चाहिए ?

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29 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

r. varshney के द्वारा
June 15, 2016

फूलबाग जुहारी कालेज के पास बाजा लेन में बने चटटौं से बहुत पानी की बवाॆदी हो रही है इसे रोकने की कोशिश करें धंयवाद 

Manish के द्वारा
January 9, 2016

The indian parliyament is the biggest jury of our nation and it’s members must remember their duties and responsbilities .Public send them to hold the nation well way but not for debets for their personal matters.

AMIT PATEL के द्वारा
August 27, 2014

SONIYA NE HMARE DESH K LIYE KBI GOOD THINK KIYA .MANMOHAN KO MOHRA BNA K DESH KA STYNASH KAR DIYA . TABHI USE YAHA K DOCTOR PE VISWAS NI H AUR ELAJ K LIYE FOREIGN BHAG JATI

Anil Sharma के द्वारा
August 15, 2014

It is very difficult to avail services of Gurgaon ESIC hospital. The security staff is very rude by nature. They use profane language with consumers. In OPD they make 10 to 15 people stand in one go. The relatives of security or ESIC staff does not need to stand in QUEUE. They do not care about the severity regarding the illness the patient is suffering from. Simple blood reports which takes 2 to 3 hours to publish come after 3 days. The sample that ESIC sends to another lab outside of ESIC comes after 7 days. The big thing consumer has to go to dispensary for medicines. Most of medicines are not available in dispensary. The dispensary staff says to purchase medicines from outside and submit the bill. Again there is only one day that is Wednesday to submit the bill. The paper work is so pathetic and overall it is very difficult for a patient to wander here and there. Most of ESIC staff do not think necessary to help the consumer rather than busy in their smart phones or gossiping.

soochi pathak के द्वारा
May 19, 2014

swargiya pradhanmantri rajiv gandhi ne panchayati raj byavastha ko na keval punarjivit kiya apitu sthaitva pradan karne ka v prayas kiya. desh me sanvidhan ke 73 tatha 74 ve sansodhano ke madhyam se मृतप्राय पंचायतो को जीवन प्रदान किया गया तथा संवेधानिक दर्ज दिए जाने की वजह से इनका अस्तित्व भी सुरछित हो गया है.इन संशोधनों के कारन इन पंचायतो को prasasanik अधिकार प्राप्त होने के साथ ही वित्तीय संसाधनो की गररन्ति प्राप्त हो गई ह. निर्विवाद रूप से yah तथ्य सत्य ह की वित्तीय रूप से ससक्त व स्वावलम्बी होने पर ही पंचायती राज ब्यवस्था का ग्रामीण विकास me shaskt व prabhavi योगदान सुनिश्चित करना sambhav है.पंचायती राज ब्यवस्था वास्तविक अर्थो me tabhi सफल हो पाएगाजब गाँवो me sikchha व साछरता ई रोसनी फैलेगी, ग्रामीण जन संकीर्ण bhavnao ,tuchha स्वार्थो व डॉगटराजनीति से ऊपर उठकर व्यापक सोच व चिंतन koapnane hetu gramo के विकास को सर्वोच्च वरीयता प्रदान करेंगे.

charansingh के द्वारा
April 9, 2014

आमआदमी पार्टी का असर पूरे देश में है. “.आप” अब देश के लोगो के सामने एक विकल्प है.अब यह देखना है कि लोग चोरो और बेईमानो को संसद भेजते है या फिर साफ छवि के प्रतिनिधि को भेजते हैं .अगर लोग बीजेपी ,कांग्रेस,सपा ,बसपा से ऊब चुके होगें तो निस्चित ही एस बार पुरानी राजनीती में परिवर्तन दिखेगा.दिल्ली इस बात का प्रमाण है कि वास्तव में लोग परिवर्तन चाहते हैं.

    muneeb husain के द्वारा
    April 10, 2014

    राजनीति मॆ उतरते मुसलिम नेता लॊकसभा चुनॉव की सरगर्मिय़ॉ तेज़ हॊते ही मुसलिम माैलवियाे के बयान भी चरम सीमा पर है । नेकी की राह चलवाने वाले बुराई से दुर रखने वाले अाज खुद ही राजनिति का दॉमन थाम कर राजनिति मे कूद पडे है। हदीसो को अपने मफाद के लिय़े सुनाते है। जहा अपना फायदा दिखता वहॉ हदीस याद अाती है। जैसे के एक ज़ाकिर माैलाना कलबे जवाद ने कहा कि अगर इस पार्टी को वोट किया तो बॉरवे इमाम को बुरा लगे़गा। अाैर दूसरी पार्टी को वोट किया तो कल किसी दुसरे माैलवी को बुरा लगेगा। अरे जनाब कब तक बेवकूफ बनायेगे। मै अाप से पुछना चाहता हू कि अाप ने काैन सा ऐसा काम किया है जिस से इमाम खुश होगे पहले अाप जिस लिबास को पहन कर नेतागिरि कर रहे है उस लिबास की अहमियत को पहचने। अाप को नेतगिरि करनी है तो करे नेतगिरि लेकिन मज़हब अौर इमाम को साथ लेकर नही माैलना ।अाप सिर्फ ज़किर है शिया धर्म गुरू नही धर्म गुरु ईरान वा ईराक मे मौजूद है । रही बात शिया वोट की तो ये उनका अधिकार है के वो किस को वोट करे अाैर किस को नही अब हर कोई जागरूक उसे पता है किस पाटी को वोट करने से फायदा होगा अौर किस से नुकसान । मुसिलमो की इतनी फिक् है तो उतरे राजनिति मे बनाये अपनी पार्टी ….करे मुसलिमो के लिए कुछ मगर जो मज़ा काैम को साथ लेकर राजनिति से मिलेगा वाे मज़ा अकेले मे राजनिति मे कहा-अखिर बात मे यही कहना चाहता हू कि अपनी राजनिति मे इमाम वा मज़हब के नाम का सहारा ना ले बदं करे अपनी राजनिति

DHARMVIR VERMA (GURGAON) के द्वारा
April 2, 2014

जब sonia  गांधी हिंदी बोल सकती है तो पी चिदंरंब को हिंदी बोलने में क्या दिक्कत होगी जो वो मोदी जी के खिलाफ न लड़ने को अपने आप को मजबूर बता रहा है कि ” अगर मेरी हिंदी ठीक होती तो में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ता” चिदंरंब जी आप हिंदुस्तानी होकर भी हिंदी नहीं बोल सकता और sonia गांधी विदेशी होकर भी हिंदी बोल रही है सहमत है तो शेयर करे

    AMIT PATEL के द्वारा
    August 27, 2014

    P CHIDAMBRAM JANTE H AB CONGRES KI GYI TO APNE KO BACHANE K LIYE BAHANA TO BANANA HI PADEGA

    Manish के द्वारा
    January 9, 2016

    agar P. C. sahab sahi hain to wo laden , hamlog unke sath hain .bhasa se koi fark nahi hoga akhir Desh ka sawal hai . Yadi sirf fenk hai to koi bat hi nahi , rat v kali aur din v kala .

RAHUL KUMAR के द्वारा
March 24, 2014

मेरे प्यारे भाइयो,दोस्तों,बहनो को मेरा आदर मैंने एक घोषणा पत्र तैयार किया है आपको कैसा लगा कृपया मुझे बताइये कैसा लगा १. गरीवो क लिए मुफ्त चिकित्सा ब्यबस्था करना २. महिलाओ कि सुरक्षा कइ लिए बिशेष ब्यबस्था पर जोर देना ३. भारत में अधिक से बिश्वबिधालय ब मेडिकल कॉलेज बनाना ताकि ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट शिक्षित हो सके तथा मेडिकल शीटों को बढ़ाया जाये ४. योग्यता के आधार पर तथा शिक्षित सांसदो को ही मंत्री पद दिया जाये ५. छोटे उधोगो को बढ़ावा दिया जाये ६. हर साल सरकारी नौकरी अधिक स अधिक निकाली जाये ताकि बेरोजगारी न बड़ाई जा सके ७. हर गांव में २ सरकारी डॉक्टर होने चाइये ८. स्कूल से लेकर कॉलेज तक खेलो में बढ़ावा देना चाइये ९. पुलिस पर से राजनेताओ का दवाव हटा होना चाइये तथा न किसी राजनेता कि रोकटोक होनी चाइये १०. किसानो को २४ घंटे मुफ्त बिजली कि सुबिधा ११. भारत के बड़े राज्यो को छोटा कर देना चाइये ताकि उनका विकास हो सके १२. महिलाओ को ५०% आरक्षण हो ताकि हर क्षेत्र में महिलाये जा सके १३. हर ३ गांव में एक इंटर कॉलेज कि सुबिधा तथा हर १० गांव में एक डिग्री कॉलेज बनाया जाये १४. हर २ जिलो पर एक बिश्व बिधालय होना चाइये १५. हर गांव में एक पुलिस चोकी होनी चाइये १६. संसद को जरूरत पड़ने पर ही बुलाया जाये तथा उसे ५ दिन के अंदर ही निपटाया जाये ताकि फिजूल खर्चे न बड़ा सके १७. देश को भ्रष्टयचार मुफ्त देश बनाने कोसिस करनी चाइये धन्यबाद

    Manish के द्वारा
    January 9, 2016

    are vai kis partyseho

RAJ KUMAR BARWAR के द्वारा
February 9, 2014

आमआदमी पार्टी का असर पूरे देश में है. “.आप” अब देश के लोगो के सामने एक विकल्प है.अब यह देखना है कि लोग चोरो और बेईमानो को संसद भेजते है या फिर साफ छवि के प्रतिनिधि को भेजते हैं .अगर लोग बीजेपी ,कांग्रेस,सपा ,बसपा से ऊब चुके होगें तो निस्चित ही एस बार पुरानी राजनीती में परिवर्तन दिखेगा.दिल्ली इस बात का प्रमाण है कि वास्तव में लोग परिवर्तन चाहते हैं.

Abhishek Dwivedi. Bharat के द्वारा
January 27, 2014

नौटंकी साला एक तरफ तो कहते हैं कि मतदाता जागरूक हो गए हैं और दूसरी तरफ “जय हो” इस लिए अच्छा बिज़नस नहीं कर रही क्यूकि सलमान ने नरेंद्र मोदी की तारीफ की तो उनके मुस्लिम फैंस नाराज हो गए। अरे भाई आपने तो केजरीवाल को भी पीछे छोड़ दिया नौटंकी करने में। मीडिया से अनुरोध हैं कि पहले केजरीवाल की नौटंकी पर से पर्दा हट जाने दे फिर कुछ नया दिखाए। धन्यवाद्

AMBER SINGH के द्वारा
July 8, 2013

आज हमारे देश के नेताओं की सोच को क्या हो गया है यह उन्हे खुद सोचना पड़ेगा कही आम जनता मरती है, यह लोग भाषड़बाजी मे लगे है चाहे उत्तराखन्ड हो या गया बम ब्लाश्ट ओछी भाषड़ से ओ जनता के जख्म पे मिर्च लगाने का काम करते है उन्हे लगता है जनता उनके भाषड़ो से खुश होती है परन्तु उन्हे अफ़सोस होता है की हम किसे वोट देते है जो हमारे हित कि न सोचकर अपने राजनिती लाभ कि ओर ज्यदा ध्यान देते है, अम्बर सिंह नेवादा सुन्दरपुर वाराणसी

Kumari Abha के द्वारा
June 27, 2013

ऐसी है मेरी कल्पना खुश रहती और खुशियां बांटती बड़ों का सम्मान है करती और करती बच्चों से प्यार सब से जाने रिश्ता निभाना है ऐसा उसका व्यवहार उसकी एक मुस्कान से मिले चैन ऐसी है मेरी कल्पना| मन में सच्ची आस्था है उसके हर कोई चाहे,बनना उसके जीवन का हिस्सा प्यारी सी ,निर्मल है उसकी काया दूसरों को प्रेरित है करती खूबियों से है भरी निर्बलों पर दया है करती मदद करती है सबकी सबको बस ,अपना है मानी क्या है इस दुनिया में भेद न जाने किसी को दुख देना जीवन है उसका अर्पित परिवार जनों का हरपाल रखती है ख्याल उत्साह और उमंग से भरी बातें है उसकी प्यारी -प्यारी मीठी से गुनगुनाहट लिए आँखों में हैं उसके सच्चाई की तस्वीर ऐसी शर्माती इठलाती सी झुकी हुई उसकी नज़रें है पावन उसका हृदय संकल्प बड़ा दृढ़ है उसमें हर मुसीबत के लिए है हरपाल तैयार हार न माने सदा मुस्काए ऐसी है मेरी कल्पना || कुमारी आभा सकची |

Kumari Abha के द्वारा
June 27, 2013

ऐसी है मेरी कल्पना खुश रहती और खुशियां बांटती बड़ों का सम्मान है करती और करती बच्चों से प्यार सब से जाने रिश्ता निभाना है ऐसा उसका व्यवहार उसकी एक मुस्कान से मिले चैन ऐसी है मेरी कल्पना| मन में सच्ची आस्था है उसके हर कोई चाहे,बनना उसके जीवन का हिस्सा प्यारी सी ,निर्मल है उसकी काया दूसरों को प्रेरित है करती खूबियों से है भरी निर्बलों पर दया है करती मदद करती है सबकी सबको बस ,अपना है मानी क्या है इस दुनिया में भेद न जाने किसी को दुख देना जीवन है उसका अर्पित परिवार जनों का हरपाल रखती है ख्याल उत्साह और उमंग से भरी बातें है उसकी प्यारी -प्यारी मीठी से गुनगुनाहट लिए आँखों में हैं उसके सच्चाई की तस्वीर ऐसी शर्माती इठलाती सी झुकी हुई उसकी नज़रें है पावन उसका हृदय संकल्प बड़ा दृढ़ है उसमें हर मुसीबत के लिए है हरपाल तैयार हार न माने सदा मुस्काए ऐसी है मेरी कल्पना || कुमारी आभा सकची |

Kumari Abha के द्वारा
June 27, 2013

क्या दुनिया ! ये कैसी है उलझन कैसा ये सवाल है ? जिसमें फैसला भी शामिल है, एक तरफ तो है जन्मदाता, तो दुजी तरफ है,प्राणों से प्रिया || कहते हैं, किसे चुनोगे ? मैं कहता हूँ, क्यूँ ऐसी दो राहे पे खड़ा ? अनचाहे जातिबंधनों को मत थोपों, मुझे है स्वतंत्र जीना, दोनों का भरपूर प्यार मिले, ऐसी है मेरी मनोकामना || मेरा जवाब न हो, एक तरफा जीवन भर सेवा करूंगा,”हे जन्मदाता ” पर इतना भी सुन ले, ऍ दुनिया वाले क्या इतना भी खुद पर हक़ नहीं की जीवन भर रह सकूँ,बस अकेला || कुमारी आभा,सकची

Kumari Abha के द्वारा
June 27, 2013

आजादी का संदेश एक व्यापारी था,उसके पास एक बहुत समझदार तोता था| व्यापारी तोते से बहुत प्रेम करता था,एक बार व्यापारी को शहर जाना था पर शहर जाने के लिए उसे जंगल के मार्ग से होते हुए शहर जाना पड़ता था | घर के सभी लोगों ने तोहफ़ों के लिए फरमाइश की, शहर से लौटते समय वो लेकर आए,व्यापारी ने तोते से जाने से पहले पूछा की तुम्हें क्या चाहिए? तो इस पर तोते ने कहा -वो दुखी हो गया और बोला मुझे कुछ नहीं चाहिए ,पर मेरी हार्दिक इक्छा है की आप जब जंगल से होते हुए वापस घर में लौटे तो वंहा के स्वतंत्र और घूमने वालों तोतों को मेरा ये संदेश दे देना की “हमेशा खुश रहो और जीवन भर आकाश में उड़ते रहना ,मैं यंहा कैदी के समान पिंजड़े में बंद हूँ| मेरे बारे में भी तो विचार करो,और अंदर पड़े कैदी को बाहर निकालने का कोई उपाय बताओ ? व्यापारी ने उसका संदेश सुना और वादा किया की उसका संदेश जरूर पहुंचाएगा | व्यापारी काम खत्म करके घने जंगल से गुजरते हुए गया,वंहा उसे बहुत सारे तोतों की झुंड दिखाई दी, जो पेड़ पर बैठे हुए थे और अपना मन बहला रहें थे | व्यापारी वंहा रुका और अपने प्रिय तोते का संदेश देने लगा |उसकी बात पूरी होते ही एक तोता अपने पेड़ से गिर कर धरती पे आ गिरा | यह देख कर व्यापारी बहुत दुखी हो गया और सोचने लगा “यह क्या हुआ? इस प्यारे से तोते की जान मेरी वजह से गयी,अगर मैं इसे अपने तोते का संदेश नहीं देता तो यह अभी जिंदा रहता| शायद इस तोते को दुख सहा नहीं गया इसलिए इसने अपनी जान दे दी थोड़ी देर रुक कर फिर विचारने लगा -”अब पछताने से क्या फ़ायदा,कमान से निकला तीर कभी वापस नहीं होता “| विचारो में डूबा वो वापस लौट आया,अपने परिवारों के लिए बहुत सारे उपहार लाया था,सब को देकर वो अपने तोते के पास चला गया| जैसे ही वो उसके पास आया तो तोता बड़ी व्याकुलता से पूछने लगा -कहाँ है मेरा उपहार ?तोतों तक मेरा संदेश पहुचा दिया था ना? मेरे संबंधियों ने तुमसे क्या कहा? जो भी उनलोगों ने उत्तर दिया बिना कुछ छुपाय मुझे बता दो | सारे के सारे बातें, तोते ने एक ही सांस में कह डालें| व्यापारी ने ढंडी सांस ली और कहा-”ये मेरे प्यारे तोते! इस बात को भूल जाओ की तुमने मुझसे कोई संदेश बोला था ,मैं खुद ही पश्चयताप की अग्नि में जल रहा हूँ की मैंने क्यूँ तुम्हारा संदेश पहुंचाया ? व्यापारी ने दुखी कंठ से उत्तर दिया -जिद्द मत करो| यह बात सुनने की हिम्मत तुममें नहीं है |मैं तो खुद को ही कोस रहा हूँ ,की क्यूँ मैंने तुम्हारा कहना माना| तोते ने पूछा ऐसा क्या हुआ ,व्यग्रता से पंख फड़फड़ाये|तोता जिद्द करने लगा तब जाकर व्यापारी ने तोते को धीरज दिलाते हुए बोला की सुनो ,पर दुखी मत होना,सुनो – जब मैंने तुम्हारा संदेश कहा तो एक तोता तुरंत ही पेड़ से नीचे गिर पड़ा और तड़पता रहा |यह देख कर मैं लज्जित हुआ| जैसे ही व्यापारी ने अपने बात पूरी की तोता काँपने लगा और पिंजड़े में गिर पड़ा,उसके प्राण पखेरू उद गए |व्यापारी ज़ोर से चिलाया और विलाप करने लगा| अपने सिर पर हाथ पकड़ कर बैठ गया फिर उसने कुछ मिनट बाद पिंजड़े का दरवाजा खोला,और तोते को बाहर निकाला | जैसे ही तोते को जमीन पर रखा,तो तोता झट से दीवार के सामने बैठ गया | व्यापारी का मुख अचरज से भर गया,उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया,की वो क्या बोले, तोते ने व्यापारी को बोला मैं आपको बहुत शुक्रिया करना चाहता हूँ ,क्यूँ की आप मेरे लिए अनमोल तोहफा लाये हैं और वो उपहार है “स्वतंत्रता “जिसका कोई मोल नहीं है | कोई भी बंधन में नहीं रहना चाहता है| जंगल के तोते ने गिर कर बता था की मैं खुद कैसे स्वतंत्र हो सकता हूँ | व्यापारी निःशब्द खड़ा रह गया और तोता आकाश में फुर उड़ गया | कुमारी आभा,सकची जमशेदपुर |

Kumari Abha के द्वारा
June 27, 2013

श्री सिंह जी मैं आपकी बात से भी सहमत हूँ ,हमारे यंहा इन्सानों की कीमत भलें ही कुछ न हो, पर अपनी जान की कीमत को तो हम ही समझ सकते हैं|निरंतर ही प्रयास करने से सब कुछ सही होगा|जब तक हम अपनी परेशानियों को लोगों तक पहुंचाएँगे ही नहीं तो कोई सोचने पे मजबूर कैसे होगा ,क्यूँ न हमारा समाज साथ तभी देता है जब हम खुद से आवाज उठाते हैं ,नहीं तो कोई नहीं सुनता “कुएँ का मेढ़क बन के क्या होगा| ऐसा नहीं है कोई भी सही -गलत काम सिर्फ एक या दो आदमी के लिए होता है उसका फर्क तो हर किसी को फर्क पड़ता है| आज को हम चुप हैं और अपनी समझदारी समझते हैं न किसी मामले में ना पड़े या उसका विरोद नहीं करते ,तो समाज उसकी को ही अपने रूप में ढाल लेता है और कल वो वही समस्या से हमे भी जूझना पड़ता है,तो हम सब क़ी भलाई इसी में है सभी सही -गलत चीज़ों को परखें और उनपर कड़ी नज़र रखें और अपना आवाज़ रखें | शुरुआत तो हम को ही करना होगा,क्यूँ क़ी कोई हमारे लिए कुछ नहीं करेगा, हमें ही आगे बढ़ना होगा और राशतें खोजने होंगे |

Kumari Abha के द्वारा
June 15, 2013

प्यार प्यार कमजोर दिल इंसानों के लिए नहीं है प्यार एक आस्था है , एक शक्ति है प्यार कोमल और अमर है , प्यार निर्मल है अजर है प्यार सहनशीलता को बढ़ता है, प्यार मन की मजबूती को दर्शाता है प्यार रिश्तों को सच्चाई से निभाना सिखाता है प्यार जीवन को बेहतर बनाता है प्यार खुशियों में चार-चाँद लगाता है प्यार दूरगामी को निकट लाता है प्यार नव-चेतन जागता है प्यार हर बंधनों से मुक्त है प्यार कोमलता की ओर ले जाता है प्यार निर्णयों को लेने की क्षमता को मजबूत करता है प्यार दुश्मनी को दूर करता है प्यार जलन को खत्म करता है प्यार किसी जाति-धर्म का मोहताज नहीं प्यार तो बस जीवन जीने का नाम है साथियों प्यार सच्ची सुंदरता का प्रतीक है प्यार समस्या को आसान बनाता है प्यार दूसरों की सेवा का नाम है प्यार निर्बल को सबल बनाता है प्यार तप्ति धूप में अचानक से झम -झम बारिश का नाम है प्यार सिर्फ लेने का नहीं, देने का भी नाम है प्यार बाटें खत्म नहीं होता, जैसे समुद्र से पानी कम नहीं होता है प्यार तो खुशी में आंखे नम भी करता है तो कंही प्यार रोते हुये को हसाना भी जानता है प्यार तो अनमोल सदा, जो हर कोई चाहे है पाना प्यार की कीमत क्या लगाओगे,सारी दुनिया है इसकी दीवानी प्यार का बदला प्यार सिखाये, प्यार से जीवन हो सदा सुखमयी प्यार से दुनिया जीता जाता , प्यार है ज्योति है अनंतमयी ।

    s.p.singh के द्वारा
    June 15, 2013

    प्रिय पुत्री समान आभा,  आपका कथन सही है आपकी कविता की व्यथा भी सुन्दर है लेकिन क्या करे हमारे देश की व्यवस्था ऐसे ही है जहाँ साधारण नागरिक की कोई कीमत ही नहीं है. इस लोकतान्त्रिक व्यवस्था में केवल सक्षम और गुंडे तत्वों का ही बोलबाला है जहाँ हर अपराध संगठित रूप में होता है इस अपराध की दुनिया की गंगा निचे से ऊपर की और बहती है आपने तो केवल एक पार्किंग के लिए भुगतान किया लोग तो जान बचाने के लिए भी भुगतान करते है > लेकिन आपसे एक शिकायत है की आपने लगभग २ वर्ष पुरानी पोस्ट के द्वारा यह कमेन्ट मुझे पोस्ट किये , कृपया मेरी नहीं पोस्ट का भी अवलोकन करे./ धन्यवाद.

    Kumari Abha के द्वारा
    June 27, 2013

    आजादी का संदेश एक व्यापारी था,उसके पास एक बहुत समझदार तोता था| व्यापारी तोते से बहुत प्रेम करता था,एक बार व्यापारी को शहर जाना था पर शहर जाने के लिए उसे जंगल के मार्ग से होते हुए शहर जाना पड़ता था | घर के सभी लोगों ने तोहफ़ों के लिए फरमाइश की, शहर से लौटते समय वो लेकर आए,व्यापारी ने तोते से जाने से पहले पूछा की तुम्हें क्या चाहिए? तो इस पर तोते ने कहा -वो दुखी हो गया और बोला मुझे कुछ नहीं चाहिए ,पर मेरी हार्दिक इक्छा है की आप जब जंगल से होते हुए वापस घर में लौटे तो वंहा के स्वतंत्र और घूमने वालों तोतों को मेरा ये संदेश दे देना की “हमेशा खुश रहो और जीवन भर आकाश में उड़ते रहना ,मैं यंहा कैदी के समान पिंजड़े में बंद हूँ| मेरे बारे में भी तो विचार करो,और अंदर पड़े कैदी को बाहर निकालने का कोई उपाय बताओ ? व्यापारी ने उसका संदेश सुना और वादा किया की उसका संदेश जरूर पहुंचाएगा | व्यापारी काम खत्म करके घने जंगल से गुजरते हुए गया,वंहा उसे बहुत सारे तोतों की झुंड दिखाई दी, जो पेड़ पर बैठे हुए थे और अपना मन बहला रहें थे | व्यापारी वंहा रुका और अपने प्रिय तोते का संदेश देने लगा |उसकी बात पूरी होते ही एक तोता अपने पेड़ से गिर कर धरती पे आ गिरा | यह देख कर व्यापारी बहुत दुखी हो गया और सोचने लगा “यह क्या हुआ? इस प्यारे से तोते की जान मेरी वजह से गयी,अगर मैं इसे अपने तोते का संदेश नहीं देता तो यह अभी जिंदा रहता| शायद इस तोते को दुख सहा नहीं गया इसलिए इसने अपनी जान दे दी थोड़ी देर रुक कर फिर विचारने लगा -”अब पछताने से क्या फ़ायदा,कमान से निकला तीर कभी वापस नहीं होता “| विचारो में डूबा वो वापस लौट आया,अपने परिवारों के लिए बहुत सारे उपहार लाया था,सब को देकर वो अपने तोते के पास चला गया| जैसे ही वो उसके पास आया तो तोता बड़ी व्याकुलता से पूछने लगा -कहाँ है मेरा उपहार ?तोतों तक मेरा संदेश पहुचा दिया था ना? मेरे संबंधियों ने तुमसे क्या कहा? जो भी उनलोगों ने उत्तर दिया बिना कुछ छुपाय मुझे बता दो | सारे के सारे बातें, तोते ने एक ही सांस में कह डालें| व्यापारी ने ढंडी सांस ली और कहा-”ये मेरे प्यारे तोते! इस बात को भूल जाओ की तुमने मुझसे कोई संदेश बोला था ,मैं खुद ही पश्चयताप की अग्नि में जल रहा हूँ की मैंने क्यूँ तुम्हारा संदेश पहुंचाया ? व्यापारी ने दुखी कंठ से उत्तर दिया -जिद्द मत करो| यह बात सुनने की हिम्मत तुममें नहीं है |मैं तो खुद को ही कोस रहा हूँ ,की क्यूँ मैंने तुम्हारा कहना माना| तोते ने पूछा ऐसा क्या हुआ ,व्यग्रता से पंख फड़फड़ाये|तोता जिद्द करने लगा तब जाकर व्यापारी ने तोते को धीरज दिलाते हुए बोला की सुनो ,पर दुखी मत होना,सुनो – जब मैंने तुम्हारा संदेश कहा तो एक तोता तुरंत ही पेड़ से नीचे गिर पड़ा और तड़पता रहा |यह देख कर मैं लज्जित हुआ| जैसे ही व्यापारी ने अपने बात पूरी की तोता काँपने लगा और पिंजड़े में गिर पड़ा,उसके प्राण पखेरू उद गए |व्यापारी ज़ोर से चिलाया और विलाप करने लगा| अपने सिर पर हाथ पकड़ कर बैठ गया फिर उसने कुछ मिनट बाद पिंजड़े का दरवाजा खोला,और तोते को बाहर निकाला | जैसे ही तोते को जमीन पर रखा,तो तोता झट से दीवार के सामने बैठ गया | व्यापारी का मुख अचरज से भर गया,उसकी समझ में कुछ भी नहीं आया,की वो क्या बोले, तोते ने व्यापारी को बोला मैं आपको बहुत शुक्रिया करना चाहता हूँ ,क्यूँ की आप मेरे लिए अनमोल तोहफा लाये हैं और वो उपहार है “स्वतंत्रता “जिसका कोई मोल नहीं है | कोई भी बंधन में नहीं रहना चाहता है| जंगल के तोते ने गिर कर बता था की मैं खुद कैसे स्वतंत्र हो सकता हूँ | व्यापारी निःशब्द खड़ा रह गया और तोता आकाश में फुर उड़ गया | कुमारी आभा,सकची जमशेदपुर |

Kumari Abha के द्वारा
June 14, 2013

गा़डी़ पॊिकंग कहां करें आजकल हर चीज़ के दाम लगते हैं,अब एक-दो रुपये से काम नहीं चलेगा,देने होंगे पूरे पांच रुपये। है ना कमाल की बात।आज मुझे पॊिकंग के देने पड़े पुरे 25 रु.कमानी सेंटर बिषटुपुर  के पास पॊिकंग करने के 5 रु.,सटेट बैंक आफ इंिडया  के पास पॊिकंग करने के 5 रु.,कोलकाता बाज़ार के पास पॊिकंग करने के 5 रु.,बसंत टाकिज झंडा चौक के पास पॊिकंग करने के 5 रु.,और फिर लेदर वॆलड के पास पॊिकंग करने के 5 रु.। अधिकतर टिकट काटने वाले बुजुॆग आदमी ही थे। और अकसर इन लोगों से बहसा-बहसी हो जाती है। मनमाना ढंग से टिकट काट रहे हैं।मैंने पूछा ,ःअंकल पहले तो यहां पॊिकंग के पैसे तो नहीं लगते थे,तो उनहोनें कहा ः ये तो 20 सालों से नियम है यहां का। फिर मैंने कहा ःइन 20 सालों मे मैंने तो आजतक पैसे नहीं दिये । बड़ी गुससे में कहने लगा आपको कया पता हम हमेशा से लेते रहेंगें। अब आप ही बताइए ,अब लोगों का कया होगा। अप-शबद भी बोलने से बाज नहीं आते,कया यही है हमारी वयवसथा….. पुलिस भी इस विषय मे चुपपी साधे हुऐ है। आप ही बताईए ये कितना सही है। कब तक चलता रहेगा ये सबकुछ…..। कुमारी आभा, बारादवीरी,साकची जमशेदपुर।

    Kumari Abha के द्वारा
    June 14, 2013

    गा़डी़ पार्किंग कहां करें ? आजकल हर चीज़ के दाम लगते हैं,अब एक-दो रुपये से काम नहीं चलेगा,देने होंगे पूरे पांच रुपये। है ना कमाल की बात।आज मुझे पार्किंग के देने पड़े पुरे 25 रु. कमानी सेंटर बिषटुपुर के पास पार्किंग करने के 5 रु.,स्टेट बैंक आफ इंिडया के पास पार्किंग करने के 5 रु.,कोलकाता बाज़ार के पास पार्किंग करने के 5 रु.,बसंत टाकिज झंडा चौक के पास पार्किंग करने के 5 रु.,और फिर लेदर वर्ल्ड के पास पार्किंग करने के 5 रु.। अधिकतर टिकट काटने वाले बुजुर्ग आदमी ही थे। और अक्सर इन लोगों से बहसा-बहसी हो जाती है। मनमाना ढंग से टिकट काट रहे हैं।मैंने पूछा ,ःअंकल पहले तो यहां पार्किंग के पैसे तो नहीं लगते थे,तो उनहोनें कहा ः ये तो 20 सालों से नियम है यहां का। फिर मैंने कहा ःइन 20 सालों मे मैंने तो आजतक पैसे नहीं दिये । बड़े गुस्से में कहने लगे आपको क्या पता हम हमेशा से लेते रहें हैं। अब आप ही बताइए ,अब लोगों का क्या होगा? अप-शबद भी बोलने से बाज नहीं आते,क्या यही है हमारी व्यवस्था ….. पुलिस भी इस विषय मे चुप्पी साधे हुऐ है। आप ही बताईए ये कितना सही है ? कब तक चलता रहेगा ये सबकुछ…..? कुमारी आभा, बारादवारी,साकची जमशेदपुर।

Yogesh Kumar "RINKU" के द्वारा
February 27, 2012

अरविन्द केजरीवालके बयान पर पूरी राजनैतिक बिरादरीएक हो गई है. ये एकता महिला आरक्षण बिल, लोकपाल बिल के समय पता नहीं कहाँ लुप्त हो जाती है. तिलमिला गई है ये बिरादरी. सफ़ेद लिबासो में छिपे इन रंगे सियारों के काले चेहरे पूरे देश के सामने जो आ रहे है. “चोर कीदाढ़ी में तिनका” वाली बात सही है. अरविन्द पर अवमानना का अभियोग लगाने की तईयारी लालू जी के गुंडों ने कर ली है. सब अपने अपने ढंग से धमका रहे है. क्या सदन की अवमानना संसद के हत्यारों को पालने से, सदन में अश्लील विडियो देखने से, सदन में हंगामा करने, तोड़फोड़ करने कार्यवाही न चलने देने से नहीं होती?? क्या सदन में बलात्कारी, दुराचारी, हत्या के आरोपी, सजायाफ्ता नहीं है. क्या सदन में बहुमत साबित करने के लिए इन अपराधियो को सदन में नहीं लाया जाता ? और ये कुकर्मी सदन की अवमानना की बात करते है ?? इन को अब अच्छी तरह समझ लेना चाहिये, देश इन के चाल- चरित्र- और चेहरा अच्छी तरह समझ चुका है. इतना आसन नहीं होगा अरविन्द पर अभियोग चलाना. ये लोग संसद को बंधक बना सकते है. पूरे देश को नहीं.

sanchita के द्वारा
December 19, 2011

हा हा हा हा नाटक क्या बात हे कोई तो मानता हे की ये सब नाटक हे वेसे barshtacha करता कोंन हे हमारी जनता उसके बाद नंबर आता हे सराकर का ये बात तो मानो या नहीं पर सही तो yahi हे

sanjeev के द्वारा
December 8, 2011

 हरियाणा टीचर पात्रता परीक्षा मे विकलागौं के साथ अन्याय किया गया है  परीक्षा परीणाम मे एस सी को 5 पर्तिशत की छूट दी गई है लेकिन विकलागौं को नहीं दी गई है या तो ctet  की तरह किसी को भी छूट ना दी  जाए या विकलागौं को भी छूट दी जाए विकलांग दिवस पर परिणाम मे विकलांगौं के साथ इससे भद्दा मजाक  और क्या होगा अत अब सरकार अपनी भूल को सुधारते हुए विकलांगौं को परर्तिशत की छूट दी जाए जिसके वो  हकदार हैं  j


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