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Jagran Junction Forum --समाजवादी पार्टी की सरकार – बदलेगी छवि या फिर लौटेगा गुंडाराज?

Posted On: 14 Mar, 2012 Others में

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1. क्या उत्तर प्रदेश में फिर से गुंडाराज का आगमन हो चुका है? :- यह तो सुनिश्चित है की जब जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी है कुछ गुंडों के द्वारा राज्य में अराजकता का आतंक जरूर फैला है अब उसे गुंडा राज या गुंडों के द्वारा चलाया जा रहा राज्य कुछ भी कह सकते है क्योंकि जब जब समाजवादी पार्टी की सरकार का राज्य देश के सबसे बड़े भू भाग पर हुआ है तब तब एक विशेष जाति के पुलिस कर्मियों का कब्ज़ा इस भू भाग पर हो जाता है ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ यह तथ्य रिकार्ड में हैं और वह मन माने ढंग से अपना शासन चलाते है कहीं किसी की कोई सुनवाई नहीं होती प्रत्येक थाने और पुलिस चौकी पर एक विशेष जाति के कर्मी तैनात होते है इस बात में कोई भी अतिश्योक्ति नहीं है ? यह तो इसी बात से और पुष्ट होता है कि अभी मुख्या मंत्री ने सपथ भी नहीं ली है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादियों ने अपना कहर ढाना आरम्भ कर दिया है यह तो केवल टेलर ही है पिक्चर अभी बाकी है

2. क्या समाजवादी पार्टी को गुंडों की पार्टी कहना सही है?:- यह तो इसी बात से परिलक्षित होता है की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं एक पहलवान रहे है और हम लोक-सभा में देखते है कि चाहे बात महिला आरक्षण की हो लोकपाल बिल की बात हो यह कोई भी व्यापक राष्ट्रीय हित के मुद्दे हों उन पर अध्यक्ष जी आस्तीन चढ़ा कर अपना आक्रोश हमेशा दिखाते रहे है ? या पीछे देखें तो राम मंदिर आन्दोलन में सरकार द्वारा गोलिया चलाना – या उत्तराखंड आन्दोलनकारियों पर यु.पी. मुजफ्फर नगर के रामपुर तिराहा का कांड जिसमे महिलाओं का उत्पीडन और आन्दोलनकारियों पर अत्याचार सबकुछ समाजवादी पार्टी के खाते में ही है इसलिए समाजवादी पार्टी को गुंडों की पार्टी कहने पर कोई अतिश्योक्ति नहीं है – क्योंकि समाजवादी पार्टी के द्वारा सुशासन की बात सोचना बेमानी होगा इस लिए इस पार्टी के विषय में आगे के लिए आप कुछ भी सोंच सकते है ? क्योंकि पार्टी में लोकतंत्र के नाम पर केवल बाप बेटा भाई बहु चाचा आदि ही है ?

3. क्या समाजवादी पार्टी को पर्याप्त बहुमत एक शांतिपूर्ण शासन का संकेत है? लोकतंत्र में जहाँ पूर्ण बहुमत की सरकार होना एक स्थिरता का लक्षण है वहीँ जनहित में यह अशुभ लक्षण हैं शांति पूर्ण शासन और स्थिर शासन में बहुत अंतर है : जहाँ पूर्ण बहुमत की स्थिति,स्थिरता को जन्म देने के साथ साथ निरंकुशता को प्राश्रय देती है वहीँ अल्पमत का शासक हमेशा चौकन्ना हो कर जनहित में शासन को चलता है और हमेशा जनता की भलाई के कार्य करता है — क्योंकि सम्पूर्णता व्यक्ति में दंभ का निर्माण करती है –इस लिए समाजवादी पार्टी के पास पूर्ण बहुमत होना शांति पूर्ण शासन का संकेत कदापि नहीं हो सकता ? जिस प्रकार ” कनक कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय | ये खाए बौराय जग वो पाए बौराय | ”

4. क्या उत्तर प्रदेश में अखिलेश की राजनीति गुंडों का सफाया कर देग?:- ऐसा सोचने में कोई आपत्ति तो है नहीं परन्तु जामिनी हकीकत इससे सौ गुना भिन्न है इसमे कोई दो राय नहीं हो सकती की जिन गुंडों ने कुछ समय पहले तक हाथी की सवारी बहुत ही शान से की थी वह अब पैदल हो गए है इस लिए उन्हें सवारी तो चाहिए ही तो हाथी से उतर कर साइकल चलाने में हर्ज ही क्या है और रातों रात कुछ हाथी सवार ही नहीं और भी दूसरी राजनितिक पार्टियों के पैदल कारिंदे साइकल की सवारी को उतावले ही नहीं उन्होंने नई साइकल खरीद भी ली है केवल सवारी के इन्जार में हैं. दूसरी महत्त्व पूर्ण बात यह की अपने पहलवान पिता के अडंगेबाज आचरण के विपरीत समाजवादी पार्टी के नवनिवार्चित नेता अखिलेश यादव ने विधान सभा चुनाव में जिस प्रकार करोड़ों बेरोजगार नवयुवकों और छात्रों को फ्री लैपटॉप, टैबलेट , साइकल और बेरोजगारी भत्ता देने का ऐलान करके अपनी ओर आकर्षित किया और सफलता पाई अगर वह अपने इस वायदे को पूरा नहीं कर पाए तो उत्तर प्रदेश में अखिलेश की राजनीति गुंडों का सफाया करना तो दूर इस असंतोष से जो नए गुंडे बनेगे उनसे पार पाना शायद संभव ही नहीं हो सकेगा क्योंकि विकट आर्थिक संकट के कारण ये सारे वायदे पूरे करना कभी भी संभव नहीं होगा ?
इस लिए जहाँ इतने सारे विरोधाभास हो समाज वादी पार्टी चाह कर भी अपनी छवि नहीं बदल पायेगी अगर मायावती के शब्दों को देखे नो उन्होंने यह कहा है की मेरी हार का सबसे बड़ा कारण ७० प्रतिशत मुस्लिम वोट का नहीं मिलना है ? इसलिए यह सारा वोट अगर समाजवादी पार्टी को गया है तो क्या इन सभी मुस्लिमों को अखिलेश संतुष्ट कर पाएंगे शायद नहीं ? इसलिए मेरा मानना है की समाजवादी पार्टी की सरकार की छवि बदलेगी कभी नहीं बदलेगी बल्कि गुंडाराज अवश्य लौटेगा ?

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

JJ Blog के द्वारा
March 21, 2012

आदरणीय सोहनपाल सिंह जी, आपका ब्लॉग “क्या फिर लौटेगा गुंडाराज” नाम से दिनॉक 21 मार्च 2012 को दैनिक जागरण के संपादकीय पृष्ठ पर सभी संस्करणों में प्रकाशित हुआ है. इस हेतु आपके पास सूचना आपकी मेल आई डी पर भेजी जा चुकी है. मंच की तरफ से आपको हार्दिक बधाइयां धन्यवाद जागरण जंक्शन परिवार

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    महोदय, जागरण जंक्शन परिवार को मेरी ओर से हार्दिक आभार – धन्यवाद.

Sumit के द्वारा
March 16, 2012

मुझे तो लगता है नकारात्मक परिणाम ज्यादा देखने को मिलेंगे …………..सपा की जीत सच में एक नया इतिहास लिखेगा………..मगर सकारात्मक या नकारात्मक ….ये नहीं पता http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/03/15/आत्महत्या/

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    श्री vikash कुमार जी आपको हार्दिक धन्यवाद.

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    सुमित जी आपको हार्दिक धन्यवाद.

vikaskumar के द्वारा
March 16, 2012

अगर किसी पार्टी के राष्ट्रीय अधयक्ष पहलवान हों तो क्या इस आधार पर उसे गुंडों की पार्टी माना जाएगा ?क्या  पहलवान होना गुंडा होने की निशानी है ? ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को क्या आप बहुत बड़ा गुंडा समझते हैं ?

    s.p.singh के द्वारा
    March 16, 2012

    भाई विकास कुमार जी मैंने किसी पहलवान को गुंडा नहीं कहा है कृपया भूल सुधार कर ले – केवल कांटेस्ट के सन्दर्भ में ही मेरा लेख है अन्यथा न ले . प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद.

    Vipul के द्वारा
    March 16, 2012

    सिंह जी के अन्दर कोई बड़ा व्यक्तिगत फ्रस्ट्रेशन जरूर है, जो शुरू से ही इनसे ऊलजलूल लिखवाता रहा है. इनके सारे ब्लॉग पढ़िए, आपको समझ में आ जाएगा की ये अवश्य किसी न किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं.

    dineshaastik के द्वारा
    March 18, 2012

    विपुल जी किसी की आलोचना भी करें तो शिष्टता में करें। यह मंच है। कोई संसद और विधानसभा नहीं, जहाँ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करना अपनी शान समझा जाता है।

    s.p. singh के द्वारा
    March 18, 2012

    भाई विपुल, किसी भी व्यक्ति या किसी केl लेख पर टिपण्णी करने से पहले आप स्वयं को सयंत करे फिर टिपण्णी करे कांटेस्ट की विषय वास्तु न तो मेरी है और न शब्द मेरे हैं क्या आप जागरण मंच की टीम पर आरोप लगा रहे हैं की वह लोग मुझ से गलत उलजलूल लिखवा रहे हैं. न तो लेख में अपशब्द लिखे है और न ही किसी को अपराधी ठहराया है – मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है की आपको मुझ से किस बात की अलर्जी है क्योंकि आपने मेरे सारे ;लेखों की भाषा को हो उलजलूल की श्रेणी में रख दिया है मैं तो यह समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप कितने बड़े विद्वान है / आलोचना करना आपका अधिकार है लेकिन विषय वास्तु से हट कर कैसी आलोचना — क्योंकि जागरण मंच ने जो चार बिंदु दिए है मैंने उन्ही चार बिन्दुओं पर अपने विचार प्रकट किये है अगर वह सवाल ही गलत है तो आप जागरण मंच से विरोध दर्ज  करे तो  बात कुछ समझ में आती है लेकिन शायद आप डाक्टर भी हैं जो आपने मुझे मानसिक बीमारी से ग्रषित बता दिया – इसलिए मैं आपको चुनौती देता हूँ कि आप वर्तमान लेख के एक – एक तथ्य पर मुझसे बहस कर लीजिये मैं अपने लेख के प्रमाण में आपको तथ्यों से अवगत करा दूंगा – मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि कृपया आप मुझे केवल यह बता दीजिये कि राममंदिर आन्दोलन के निहत्थे कारसेवकों पर किस सरकार ने गोलियां चलाई थी और उसमे कितने लोग मारे गए थे — उत्तराखंड के आन्दोलनकारियों स्त्री पुरुषो पर किसने गोलियां चलवाई थी और वहां उस समय पुलिस का कैसा तांडव हुआ था अगर आपको जानकारी नहीं है तो फिर इस प्रकार कि अनर्गल टिप्पणी करने से बाज आयें ? वैसे भी तथ्यों कि जानकारी के बिना आलोचना करना केवल बौखलाहट को दर्शाता है ? फिर भी आलोचना के लिए आपका आभार

shashibhushan1959 के द्वारा
March 16, 2012

आदरणीय सिंह साहब, सादर ! सच पूछिए तो भविष्य बहुत अंधकारमय दिखता है ! बंधे हुए कुत्ते से ज्यादा खतरनाक खुले और आवारा कुत्ते होते हैं ! और जब कोई शक्तिशाली मालिक उनके पीछे खडा हो तो वे केवल भौंकते ही नहीं बल्कि काटने से भी परहेज नहीं करते ! सधन्यवाद !

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय भूषण जी प्रणाम एवं हार्दिक धन्यवाद.

chandanrai के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय सिंह साहब, आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! बहुत बेहतर Pls. comment on http://chandanrai.jagranjunction.com/Berojgar

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    आदरणीय राय जी आपका हार्दिक धन्यवाद.

dineshaastik के द्वारा
March 15, 2012

आदरणीय सिंह साहब, बहुत ही सटीक एवं तार्किक विवेचन किया है आपने। सचमुच कठिन डगर है पनघट की।

    s.p.singh के द्वारा
    March 22, 2012

    प्रिय देनेश जी आपका हार्दिक धन्यवाद.

Tamanna के द्वारा
March 14, 2012

एस.पी सिंह जी….. सपा की आचार-संहिता से हम सभी परिचित है. बीएसपी की नीतियों के कारन जनता में जो रोष पैदा हुआ था उसकी वजह से सपा की जीत निश्चित ही थी. क्योंकि जनता के पास सपा के अलावा और कोई विकल्प नहीं था लेकिन वह अब खुद को सत्ता के काबिल साबित कर पाते हैं या नहीं बस यह देखने वाली बात होगी. http://tamanna.jagranjunction.com/2012/03/14/congress-vs-samajwadi-party/

    s.p. singh के द्वारा
    March 14, 2012

    आदरणीया तमन्ना जी प्रणाम, आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद.

ajaydubeydeoria के द्वारा
March 14, 2012

सिंह साहब नमस्कार, हर क्या का जबाब भविष्य के गर्भ में है? सपा को बदलना ही पड़ेगा.

    s.p. singh के द्वारा
    March 14, 2012

    बंधुवर समय बहुत बलवान होता है भविष्य भी अगर सुन्दर हो तो क्या कहने परन्तु अगर करेला नीम पर उगता तो उससे खीरे जैसा स्वाद नहीं आसकता , आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यबाद.

yogi sarswat के द्वारा
March 14, 2012

आदरणीय श्री एस . पी . सिंह जी नमस्कार ! बहुत सटीक विश्लेषण और बिलकुल ठीक विचार ! आपने हर महत्वपूर्ण बिंदु को छुआ है और उसका आंकलन किया है ! बहुत बेहतर !

    s.p. singh के द्वारा
    March 14, 2012

    योगी जी आपकी सुन्दर प्रतिक्रिया के प्रति आभार एवं धन्यवाद.


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