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ताऊ जी जब मुखिया जी बने !!

Posted On: 29 Sep, 2014 Others,social issues,Politics में

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यूं तो उत्तर भारत में सनातनधर्म में आस्थवान बहुत सी स्त्रियां एकादशी को वृत्त रखती है लेकिन एक एकादशी ऐसी भी आती है जिसको निर्जला एकादशी कहते है और उस दिन वृत्त करने वाली स्त्रियां २४ घंटे तक जल की एक बूँद भी ग्रहण नहीं करती शायद इसीलिए इस दिन को निर्जला एकादशी कहते हैं. हमारे गावं में एक सत्तर वर्षीय व्यक्ति रहते है। जिनको लोग ताऊ कह सम्बोधित करते थे ताऊ हमेशा ज्ञान ध्यान, भजन संकीर्तन, योग व् स्वस्थ्य पर लींन रहते थे . उनका स्वास्थ्य भी गजब का है सत्तर की उम्र भी ५०-५५ के लगते है । पिछले वर्ष गाव के मुख्य लोगो ने मिल कर तय किया और उनको गाँव का मुखिया निर्वाचित करवा दिया तब से समस्त गावं वासी उनको मुखियाजी कहने लगे है उससे पहले तो उनको केवल ताऊ कहकर सम्बोधित किया करते थे । अब जब से ताऊ मुखिया जी बने है उनकी तो दिनचर्या ही बदल गई है गावं में विकास कोई भी कार्य हो मुखिया जी पूरी तन्मयता के साथ कार्य समाप्त होने तक वहीं बने रहते है न किसी को खाने देते है और न चुराने देते है । चारो और मुखिया जी के कार्यों का डंका बजने लगा है । पत्र कारों और न्यूज चैनलों के रिपोर्टरों की तो गाड़िया गावं में चारों और चक्कर लगाती रहती है कि कहीं से तो मुखिया जी केखिलाफ कुछ मशाला मिले लेकिन सबी फेल हो गए और मुखिया जी की चारो ओर वाह वाह होने लगी ।
खबर जिले के आला अधिकारीयों तक भी पहुँच ही गई तब जिलाधिकारी महोदय ने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों को सन्देश भेज कर एक हफ्ते का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया और मुखिया जी को विशेष रूप में उस प्रशिक्षण का मुख्य वक्ता नियुक्त किया और आदेश दिया की गाँव के विकास की सभी बारीकियों को सभी प्रतिभागियों को समझायेंगे, मुखियाजी को जबसे यह आदेशनुमा निमंत्रण मिला है मुखिया जी की बल्ले बल्ले – पूरा गाँव ही खुशियों में डूब गया सारे लोग उल्लसित से नजर आने लगे है जैसे किसी त्यौहार का आगमन होने वाला है । क्योंकि मुखिया जी जब केवल ताऊ थे उस समय इसी वर्तमान जिलाधिकारी ने ताऊ जी के लिए जिले की सीमा के अंदर आने को प्रतिबंधित कर दिया था और यह प्रतिबंध उनके मुखिया होने तक जारी थे । इस लिए ताऊ के साथ साथ पुरे गाँव के लोग उत्साहित थे । अब इस उत्साह के मौसम में एक अड़चन आने वाली जो है वह यह कि बेचारे मुखिया जी माँ भगवती के अन्यन भक्त है और उपवास के पूरे नौ दिन तक अन्न ग्रहण नहीं करते यहाँ तक की पूरे दिन निर्जल रहकर केवल सांयकाल में ही कुछ फल और निम्बू पानी लेते है । गाँव वालो ने मुखिया जी से कहा कि हमलोग जिलाधिकारी से मिल कर प्रशिक्षण कार्यक्रम को कुछ आगे करवा देते क्योंकि वहां तो लोग सारे दिन कुछ न कुछ दावत उड़ाते रहेंगे आप कैसे बर्दास्स्त करेंगे ! परन्तु मुखिया जी नहीं माने और उन्होंने ने ऐलान कर दिया कि वह जिले में में प्रशिक्षण के दौरान उपवास में फल भी ग्रहण नहीं करेंगे केवल निम्बू पानी पर ही निर्भर रहेंगे । अब इस पोस्ट को लिखते समय मुखिया जी का जिले का दौरा आरम्भ नहीं हुआ है इसलिए अब हम तो इस इन्तजार में है की ऊपर वाला मुखिया जी को इतनी शक्ति दे की उनका यह कार्यक्रम सफल हो ! लेकिन यह लेख पोस्ट करते समय एक खबर भी हवा में तैर ही गई कि सभा स्थल पर ताऊ के अतिउत्साही चेलों ने एक वरिष्ठ पत्रकार की जबरजस्त पिटाई भी कर दी है : एस पी सिंह, मेरठ

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