पाठक नामा -

JUST ANOTHER BLOG

206 Posts

1915 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2445 postid : 1118737

सेकुलरिज़म : धर्मनिरपेक्ष बनाम पंथ निरपेक्ष ?

  • SocialTwist Tell-a-Friend

भारतीय जनता पार्टी के लोग अपने आपको जितना समझदार चतुर और ज्ञानी एवं, चालक समझते हैं शायद आम जनता में समझदार वर्ग एवं संसार सहित भारत का बुद्धिजीवी वर्ग उनलोगो को ऐसा नहीं समझता है ? कारण यह है की भारतीय जनता पार्टी यानि की राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ की राजनितिक शाखा को जो शिक्षा दीक्षा बचपन से शिशु मंदिरो में दी जाती है खासकर स्वर्ण जाती के बच्चों को उसका ही प्रभाव उनके चरित्र में गहरे पैंठ कर जाता है ? और फिर जब नौजवानो को आर एस एस द्वारा पूर्णकालिक स्वयं सेवक बना कर ब्रह्मचर्य का व्रत दिलाया जाता है तो रही सही कसर भी सामाप्त हो जाती है और फिर जब ये लोग राजनीती की और धकेले जाते हैं तब तक पूर्ण रूप से तप कर कट्टर धार्मिक हिंदुत्व के झंडा बरदार बन चुके होते है ? और फिर जब ये लोग सत्ता प्राप्त कर लेते है तो घूम फिर कर हिंदुत्व की बातों के अतिरिक्त इनको कुछ नहीं आता ? जैसा की अब तक का इतिहास है? इनकी कार्यशैली ठीक किसी उसी कट्टर तालिबानी के सामान ही है ? क्योंकि अरर एस एस और भारतीय जनता पार्टी सत्ता में काबिज होने के बाद जिस हिंदुत्व और भारत में रहने वाले सभी लोगों को हिन्दू बनाने की बात करती है तो उसे यह भी जान लेना चाहिए की डाक्टर आंबेडकर के अनुयायी अगर आंबेडकर का ही अनुसरण करे और सारे के सारे बौद्ध धर्म को ही अंगीकार कर ले तो देश की हालात क्या होगी जहां क्या इस बात को बीजेपी समझना ही नहीं चाहती ? क्योंकि ८५ पर्तिशत बौद्ध और मुस्लिम मिल कर किसी भी पार्टी को बहुमत दिला सकते है और नहीं भी दिला सकते !

। जैसा की 27 नवम्बर 2015 को संसद की कार्यवाही में देखने को मिला जब देश के गृह मंत्री जिनको खाकी निकर पहनने में गर्व की अनुभूति होती है ! एक साधारण नागरिक और होनहार सिनेमा के प्रसिद्ध कलाकार को उसकी व्यक्त की गई सहिष्णुता के वातावरण पर अभिव्यक्ति का जवाब देने के लिए संसद को मंच बनाया ! इतना ही नहीं मंच भी संसद का और सहारा भी संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव रामजी आंबेडकर का लेना पड़ा ? अवसर था संसद का 2 दिन का विशेष अधिवेशन संविधान के निर्माता अंबेडकरजी को श्रधांजलि देने के लिए ? लेकिन इसका उपयोग किया आमिर खान को जवाब देने के लिए ! गृह मंत्री ने कहा की बाबा साहेब ने उपेक्षाओं को झेलते हिये भी कभी यह नहीं कहा की वह देश छोड़ कर चले जायेंगे ! परंतु ऐसा कहते हुए भी उन्होंने तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया, बाबा साहेब ने कथित स्वर्ण वर्ग द्वारा अपनी उपेक्षाओं के विरोध देश तो नहीं छोड़ा लेकिन अपना हिन्दू धर्म और दलित जाती को ही छोड़ फिया था और बौद्ध धर्म स्वीकार किया था ? और इस अवसर पर उन्होंने कहा था की मैं पैदा जरूर हुआ हूँ हिन्दू धर्म में लेकिन मैं हिन्दू धर्म में मारूँगा नहीं ? और उन्होंने ऐसा ही किया ! परंतु अब यह केवल एक राजनितिक परपंच ही है जब केंद्र की सरकार दलित और पिछड़ों को अपने साथ जोड़ने में कवायद करती दिख रही है जब वह लन्दन में बाबा साहेब का स्मारक बना कर दलितों को लुभाने की कोसिस करती है ?

इसलिए जब हमरे माननीय गृह मंत्री संसद में एक बहुत तुच्छ बात पर जोर दे रहे थे और हिंदुत्व की बात करते हुए सेक्युलर शब्द के अर्थ को समझा रहे थे तो कही न कहीं वह आम्बेडकर का अपमान ही कर रहे थे ! क्योंकि यह सत्य है की संविधान में सेक्युलर शब्द 1976 में जोड़ा गया था परंतु इसकी अवधारणा संविधान के मूल चरित्र में विद्यमान थी? हमें तो लगता है आज जब बीजेपी यानि अरर एस एस की पूर्ण बहुमत की सत्ता में केंद्र पर काबिज है तो अपने चरित्र के अनुसार एक बार फिर हिंदुत्व की बात करके दलित दबे पिछड़ों को इतना प्रताड़ित कर देना चाहती है की वह बाबा साहेब भीमराव की तरह हिन्दू धर्म को ही छोड़ दें ? और शायद बीजेपी का यह दिवास्वप्न कभी साकार होने वाला नहीं है ?

वैसे भी केंद्रीय गृह मंत्री के द्वारा सेक्युलर। शब्द की व्याख्या संसद में बीना किसी प्रयोजन के करना शोभा नहीं देता ? वैसे तो उनमे इतनी क्षमता गृह मंत्री होने नाते स्वमेव ही आ जाती है की वह एक प्रस्ताव के द्वारा सेक्युलर शब्द की परिभाषा अपनी व्याख्या के अनुसार बदल सकते हैं तो फिर अनावश्यक चर्चा क्यों ? शायद यह गुजरात का मोदी मॉडल है। जनता को भयभीत करके शासन करने का । दलित प्रेम के दोखवे का सच भी यही है जब भय से काम न चले भेद कस प्रयोगकरो ?

एस पी सिंह। मेरठ

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Susannah के द्वारा
July 11, 2016

I can’t remember kung ilan na ba nabili ko I think this is my 5th or 6th hehe but I’m pretty sure dadami pa trcnaastions ko from sir Benedict. Thanks again for the headphones, until our next deal =)


topic of the week



latest from jagran