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फेयर एंड लवली स्कीम 2016 उर्फ़ VDIS 2016

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आश्चर्यजनक किन्तु सत्य के करीब दुनिया का आठंवा आश्चर्य यह कि भारत से काला धन कभी समाप्त नहीं हो सकता ? जबकि आबादी का केवल 3% से काम लोग ही करदाता हैं , इनमे से अधिकांश वेतन भोगी कर्मचारी और छोटे मोटे व्यापारी पर्चुनिये ही हैं जिनकी संख्या लगभग 89 % है जिनकी आय 5 लाख तक है और 1.3% करदाता की आय 20 लाख तक है उसके बाद केवल 42800 करदाता ऐसे हैं जो 1 करोड़ से अधिक कर देते है ? अब अगर देश के 3 प्रतिशत करदाताओं शिकंजा नहीं कस सकती तो उसे हर बार VDIS scheme लानी ही पड़ेगी ?

फेयर एंड लवली, आप सही समझे क्या, नहीं न ? चलो हम ही बता देते हैं यह चेहरा गोरा करने की क्रीम नहीं है ? न ही यह कोई प्यार व्यार करने का कोई फॉर्मूला है ? यह फेयर एंड लवली किसी वैज्ञानिक का ईजाद किया गया फॉर्मूला भी नहीं है ? यह भारत सरकार के प्रधान मंत्री द्वारा निर्देशित और भारत के वित्त मंत्री द्वारा घोषित एक योजना है फेयर एंड लवली उर्फ़ VDIS स्कीम है एक ऐसी योजना है जिसमें टैक्स चोर और भ्रष्ट व्यापारी और उनके परिवारिक गण अपना काला धन केवल 30 प्रतिशत टैक्स और 15 %, पेनल्टी देकर अपने किये गए पापों से मुक्ति पा सकते हैं ? यह योजना केवल 4 माह के लिए ही होगी जिसकी तारीखों का ऐलान करना अभी बाकी है ? अगर कोई व्यापारी भाई बहन इस योजना से वंचित रह भी जायेगा तो उसे फ़िक्र करने की जरूरत नहीं है ? क्योंकि यह योजना सतत चलने वाली योजना है जिसमे राजनितिक और व्यापारिक हित फेविकोल के जोड़ की तरह मजबूत हैं ? जिसका अपना इतिहास है ? यह योजन परतंत्र भारत में भी विद्यमान थी ?

क्योंकि ना तो यू पी ए की सरकार को और ना ही एन डी ए सरकार को आज तक यह नहीं मालूम की विदेशो में भारतियों का कितना काला धन जमा है ? और यह भी नहीं मालूम की देस में कितना काला धन है ? चूँकि भारत सरकार ने उच्चतम न्यायालय को यहबताया है की अनुमानित 500 बिलियन डॉलर, भारतियों का विदेश में जमा है ! लेकिन केंद्र सरकार के राजस्व सचिव बताते है कि या राशि 45 लाख करोड़ हो सकती है ? फिर एक बार आडवाणी जी ने भी कहा था कि यह राशि 50 – 60 लाख करोड़ के बराबर है, राजनाथ सिंह जी ने चुनाव प्रचार में कहा था यह राशि 25 लाख करोड़ है । फिर हर जगह टाँग अड़ाने वालें रामसेवक यादव उर्फ़ राम देव उर्फ़ योग गुरु रामदेव उर्फ़ स्वामी राम देव उर्फ़ व्यापारी राम देव अर्थ शास्त्री बोलते है की विदेशो में जमा काला धन 4 लाख हजार करोड़ रुपया है ? हद तो तब हो गई जब मौजूदा प्रधान मंत्री कहते थे कि अगर हम सत्ता में आये तो विदेशो में जमा काला धन वापस लायेंगे और 15 , 15 लाख रुपया सभी भारत वासियों के खाते में आ जायेगा ?

अब हम बात करते है फेयर एंड लवली स्कीम 2016 की लेकिन इससे पहले हम आपको बताये देते है क़ि NDA द्वारा प्रस्तावित यह स्कीम कोई पहली बार नहीं आ रही है इससे पहले वाली सरकारों ने भी इसी प्रकार की स्कीम अमल में लाई थी

1975 : VDIS 1975 जो 31 दिसम्बर को समाप्त हो गई थी जिसमे 1 करोड़ 15 लाख कर चोरों ने लाभ उठाया था और 744 करोड़ काले धन की घोषणा की थी तथा सरकार के पल्ले में 241 करोड़ का टैक्स आया था ? वित्त मंत्री थे सी सुब्रमण्यम और प्रधान मंत्री थीं श्रीमती इंदिरा गांधी ?

परंतु कालेधन पर अंकुश फिर भी नहीं लगा इस लिए 1981 में Special Bearer Bond Scheme 1981, लांच की गई , चूँकि भारत में न तो काला धन रखने वाले टैक्स चोर अपनी हरकतों से बाज आते हैं और ना ही सरकार इन पर अंकुश लगा पाती है ,

1985 : वर्ष 1985 में एक बार फिर कर चोरों को राहत देने के लिए Amnesty Scheme 1985 के नाम से स्कीम लाइ गई जिसमे सरकार की झोली में 700 करोड़ रुपया टैक्स के रूप में आया था ?

जब नरसिंहा राव प्रधान मंत्री बने तो उस समय देश की आर्थिक हालात चिंता जनक थे उन्होंने भारत के एक बहुत अच्छे अर्थ शास्त्री ब्यूरोक्रेट मनमोह सिंह जी पर भरोसा किया और उनको वित्तमंत्री बनाया , उन्होंने गिरती हुई अर्थ व्यवस्था को सुधरने के लिए बहुत सी स्कीम चालू की , National Housing Bank Deposit, Foreign Exchange Remittance Scheme, India Development Bond and Gold Bond Scheme
जिसके परिणाम स्वरुप भारत की अर्थ व्यवस्था पटरी पर आई थी !

लेकिन काले धन के स्रोत फिर भी पनपते रहे और अस्थिर सरकारों के कार्यकाल में तो अर्थ व्यवस्था और भी ख़राब हुई लेकिन जब 1997 में श्री आई के गुजराल के नेतृत्व वाली सरकार के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने VDIS 1997 लांच की जिसमे 700 करोड़ रूपए का टैक्स जमा हुआ था । जिसमे 350000 करदाताओं के द्वारा आय और स्थाई संपत्ति की घोषणा की गई थी ।

अभी थोड़े दिन पहले 2015 में NDA की मोदी सरकार ने विदेशी बैंकों में जमा काले धन को बाहर निकालने के लिए एमनेस्टी स्कीम लागु की थी जिसमे जिसमे 60 प्रतिशत टैक्स देकर काले धन को घोषित किया जा सकता था ? लेकिन उसका रिजल्ट उत्साह वर्धक नाजी कहा जा सकता । केवल 600 करोड़ रुपया घोषित किया गया और तस्क्स रूप में2400करोड़ रुपया आया? लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह हुई की इसी अवधि में सरकार की नाकके नीचे से 600 करोड़ रुपया राष्ट्रिय कृत बैंको के माध्यम से विदेश में भेज दिया गया ?

अब फिर से काले धन वालों को एक अवसर मिलने जा रहा है ” फेयर एंड लवली स्कीम 2016″ उर्फ़ VDIS 2016 के अंतर्गत 30 प्रतिशत कर और। 15 प्रतिशत पेनल्टी देकर कोई भी व्यापारी अपना काला धन सफ़ेद कर सकता है ? लेकिन हम यह नहीं समझ पाते कि यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा ? आप इसको ऐसे समझ सकते हैं कि यह व्यापारियों और पॉलिटिशियन का गांठ जोड़ है इलेक्शन में पॉलिटिशियन को धन की जरूरत होती है और इलेक्शन के बाद व्यापारियों को इस लिए यह एक दूसरे की जरूरत को पूरा करते रहते हैं इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए ? वास्तव में यह पैसा होता ही है पॉलिटिशियन का जिसको व्यापारियों के द्वारा सफ़ेद किया जाता है ?

एस. पी. सिंह, मेरठ ।



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dasia के द्वारा
July 11, 2016

I&2781#;m so glad you like the sound of it. My critique partner is not Jewish and helped me make sure that it has appeal to a wide audience, so I hope you get a chance to read it. Thank you!

bharodiya के द्वारा
March 17, 2016

नमस्कार सिंग साहब थोडा चिंतन करोगे तो समज में आयेगा कि भारत की जनता के साथ बहुत बडा खेल खेला गया है । शरीफ आदमी डरता नही है, भ्रष्ट को अनेक तरह के डर सताते हैं, आधाअधुरा भ्रष्ट भी डर और आत्मग्लानि से पिडित रहता है । राज्यकर्ताओं को निडर और कमाई के मामले में मजबूत नागरिकों की जरूरत नही थी । भले भ्रष्ट लेकिन डरे हुए नागरिकों की जरूरत थी, ऐसे नागरिक कभी सरकार के विरुध्ध खडे नही होते । नागरिकों के भ्रष्ट बनाने का शुरु हुआ १९६० के दशक में, हथियार बनाया इन्कम टेक्स को । टेक्स रेट ९६ प्रतिशत जीतना उंचा ले गये । हुआ ये कि १०० मे से ९६ सरकार को देने के बाद नागरिक के पास ४ रूपये बच जाते थे । नागरिक के पास दो ही रास्ते थे । ५ हजार तक छुट थी इस के उपर की आय में मात्र ४ पतिशत रूपये के खातिक कडी मेहन करना छोड दे और ५ हजार में ही संतोष करले या तो कमाई का हिसाब ही ना बताए । होग यी गोरे और कालेधन की खोज, उसकी व्याख्या । १९७० आते आते जनता को भी मालुम हो गया कि कालाधन भी होता है । पहले चोरी का धन होता था, कालेधन के बारेमें ताजा खबर थी । बाद के सालों में धीरे धीरे टेक्स रेट घटाते गये, अभी तो बहुत कम है लेकिन दो पिढियों को भ्रष्ट बना दिया है । कमाने में सक्षम हो ऐसे नागरिक वर्ग को आत्मग्लानि और डर के घेरे में ले लिया है । ऐसे नागरिक कभी भी सरकार के खिलाफ खडे नही होते । गरीबों की चिंता नही, भले गरीब शरीफ हो ।

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 9, 2016

अच्छा आलेख बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता हुआ कभी इधर भी पधारें और अपने बिचारों से हमें भी अबगत कराएं


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