पाठक नामा -

JUST ANOTHER BLOG

206 Posts

1916 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2445 postid : 1200659

आधुनिक महाभारत !!!!!!

Posted On: 8 Jul, 2016 Social Issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

हुआ यूँ कि धृष्टराष्ट्र की उपस्थिति में जब द्रोपदी ने ज्ञान और शिक्षा की देवी को निर्वस्त्र करना चाहा तो ज्ञान की देवी सरस्वती के अंगवस्त्र कई स्थानों से फट गए इतना ही नहीं उसके अंग भी लहू लुहान हो गए , भरे दरबार में देवी माया ने द्रोपदी पर मनमानी करने और शिक्षा की देवी को अपमानित करने का आरोप लगाये और कहा वो कन्हैय्या जिसने एक समय द्रोपदी का तन ढकने के लिए साड़ियों का पहाड़ बना दिया था उसीके नाम रूपी सरस्वती के मानस पुत्र कन्हैया तो द्रोपदी के आदेश पर जेल में ठूंस दिया गया । इतना सुनते ही तो देवी द्रोपदी आगबबूला हो गई और धृष्टराष्ट्र के सामने ही , यहाँ तक कह दिया की मैंने कोई अपराध नहीं किया है पिछले साठ वर्षो में इस शिक्षा की देवी ने अपने तन से वस्त्र ही नहीं बदले है यह कपड़ों के ऊपर कपडे धारण करती रही है , मैंने तो इस देवी सरस्वती के केवल पुराने कपडे उतार के नए भगवा वस्त्र पहनाने की कोसिस की है मैंने कोई अपराध नहीं किया है । शिक्षा की देवी सरस्वती के सड़े गले वस्त्र बदलने का आदेश मुझे किसी ने नहीं दिया यह तो ‘भागवत’ पुराण में लिखा है और लिखे हुए को मिटाना मेरे बस में नहीं , अगर देवी माया मेरे उत्तर से संतुष्ट नहीं है तो मैं अपना शीश काट के उनके कदमो में रख दूंगी ?भरे दरबार में देवी माया ने कहा देवी द्रोपदी , मैं आपके उत्तर से संतुष्ठ नहीं हूँ कृपया अपना शीश मुझे दे कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी करें ? पूरे दरबार में खलबली मचना स्वाभाविक ही था लेकिन अंधे धृष्टराष्ट्र देखते कैसे वो तो संजय उनको आँखों देखा हाल बताता था । बहुत यत्न के बाद दो माह बाद बहुत गहन विचार विमर्श के और बदनामी के बाद धृष्टराष्ट्र ने संजय को तलब कियाऔर पूंछा कि संजय तू मुझे ये बता की तू मुझे घटनाओ की जानकारी सही समय पर क्यों नहीं देता ? अब संजय क्या जवाब देता चुप रहा ! अब धृष्टराष्ट्र को अपने कुनबे की याद आना स्वाभाविक ही था तुरंत सन्देश भेजकर द्वारिका से मोटा भाई विदुर को बुलाया विचार विमर्श के बाद तय हुआ की परिवार के सभी सदस्यों को दुबारा से काम और कार्य क्षेत्र का बंटवारा किया जाय गिनती करने पर ज्ञात हुआ की ये कुल 62 है पुरे 100 भी नहीं ,तुरंत 20 लोगों सपथ दिलाकर कार्यभार सौंप दिया । और सब को एकत्र करके कडा सन्देश दिया कि अबसे आगे मैं किसी की भी गलती को !स्वीकार नहीं करूँगा ? धृष्टराष्ट्र ने तुरंत ही संजय से दूर संचार व्यवस्था का सारा भार ही छीन लिया और जयंत को भार सौंप दिया उधर द्रोपदी को कहा की तुमको कपडे उतारने और फाड़ने का बहुत शौक है इस लिए मैं आज से इस दरबार का कपडा भण्डार ही तुम्हे सौंपता हूँ चाहे जितना बनाओं चाहे जितना फाड़ो, बेचो या खरीदो । अब तुम्हे अपना शीश नहीं कटाना पड़ेगा ? इतना सबकुछ करने के बाद वे अपने विशेष विमान से अफ़्रीकी देशों की यात्रा पर निकल लिए ?

एस.पी.सिंह, मेरठ।



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran