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स्वतंत्र भारत के दबंग प्रधान मंत्री और उनका कार्यकाल !

Posted On: 15 Aug, 2016 social issues,Politics में

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आज 15 अगस्त 2016 को हमारे देश का जनतंत्र 70 वर्ष का प्रौढ़ परिपक्व गणराज्य हो गया है । भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहाँ बिना किसी खून खराबे के सत्ता का परिवर्तन हो जाता है । जो प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व करने की बात है ? वैसे इतिहास गवाह है की हमारे सभी प्रधान मंत्री लोक प्रिय रहे है जिनको जनता का भरपूर समर्थन और प्यार भी मिला ? साथ ही यह भी कटु सत्य है कि घटित घटनाओं और गफलत में लिए गए निर्णयों के कारन उनकी जरा सी चूक जानलेवा भी बनी है। भारत को स्वतंत्रता कराने में गांधी ने जब जिन्ना के विभाजन के प्रस्ताव को माना तो कट्टर हिंदुओं ने इसे गांधी की गल्ती माना जो उनकी हत्या का सबब बना ? प्रथम प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एक गल्ती की चीन से तिब्बत की पोस्ट एंड टेलीग्राम की व्यवस्था 1957 में चीन को सौंप कर चीन को अपनी कमजोरी का सबूत दे दिया जो 1962 में चीन ने भारत पर हमला करके जाँच लिया और नेहरू का पंचशील और सहअस्तित्व का सपना समाप्त हो गया जो 27 मई 1964 के दिन पक्षघात के रूप में नेहरू की जान के साथ खत्म हुआ ?इसी प्रकार शास्त्री जी जो 1965 के भारत पाक युद्ध के हीरो के रूप में स्थापित हुए अचानक रूस के तासकंद में पाकिस्तान के उस समय के राष्ट्रपति जनरल याहियाखान से समझौता करने के बाद 9/10 जनवरी 1966 की सर्द भरी रात में मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पाये और हृदय घात से दुनिया छोड़ गए । श्रीमती इंदिरा गांधी जिसको आइरन लेडी भी कहा जाता है भारत में राजाओं के प्रिवी पर्स और बैंको के राष्ट्रीयकरण , भारतीय मुद्रा के अवमूलयन जैसे साहसिक फैसले किये , पाकिस्तान की घुस्पैठ को रोकने के लिए 1971 में पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए जिसके परिणाम स्वरुप बंगला देश का उदय हुआ और पाकिस्तान के 95 हजार फौजियों को कैद कर लिया था जो इतिहास में संभवत पहली घटना है ! 18 मई 1974 को इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत के पोखरण में पहली बार परमाणु परिक्षण किया गया जिसके शांति पूर्ण परमाणु कार्यक्रम के के लिए था । 1975 में 25 जून को आपातकाल लगा कर तमाम विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया था जिसके परिणाम स्वरुप 1977 के चुनाव में बड़ी हार का सामना करना पड़ा । श्री जयप्रकाश नारायण जन नायक के रूप में उभरे और 1977 में जनता पार्टी का उदय हुआ जिसमे भारत की सभी गैर कांग्रेसी पार्टियों की हिस्से दारी थी । 24, मार्च 1977कोें ही मोरारजी देसाई प्रधान मंत्री नियुक्त हुए लेकिन अपने अंतरकलह के कारण शीघ्र ही 28/7/1979 को टूट भी गई जनता पार्टी । 27/7/1979 किसान नेता चरण सिंह ऐसे प्रधान मंत्री बने जिन्होंने संसद का सामना ही नहीं किया और 14/1/1980 को त्याग पत्र दे दिया । किसमत का खेल 14/ 1/ 1980 को फिर से इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार बनाई लेकिन आपरेशन ब्लू स्टार’ भारतीय सेना द्वारा 3 से 6 जून 1984 को पंजाब के अमृतसर स्थित हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाला और उनके समर्थकों से मुक्त कराने के लिए चलाया गया अभियान था। हालांकि पहले इस अभि‍यान का नाम ‘ऑपरेशन सनडाउन’ था। क्योंकि सारी कार्रवाई आधी रात के बाद होनी थी। रॉ ने इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन सनडाउन’ की योजना बनाई थी। 3 जून को भारतीय सेना ने अमृतसर पहुंचकर पहले स्वर्ण मंदिर परिसर को घेर लिया। शाम में शहर में भी कर्फ़्यू लगा दिया गया। इसके बाद 4 जून को सेना ने गोलीबारी शुरू कर दी लेकिन चरमपंथियों की ओर से इसका इतना तीखा जवाब मिला कि 5 जून को बख़तरबंद गाड़ियों और टैंकों को इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया।

5 जून की ही रात को सेना और खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरावाला और उनके समर्थकों के बीच जमकर मुठभेड़ हुई और भीषण ख़ून-ख़राबा हुआ। इस ऑपरेशन में अकाल तख़्त पूरी तरह तबाह हो गया। स्वर्ण मंदिर पर भी गोलियां चलीं। रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार के 83 सैनिक मारे गए और 249 घायल हुए। जबकि 493 चरमपंथी मारे गए। जिसमें कुछ आम नागरिक भी थे। इस मामले में करीब 1500 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था। इसी ऑपरेशन ब्लू स्टार का दुष्परिणाम 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के रूप में सामने आया। इंदिरा गांधी के ही दो सिक्ख सुरक्षा गार्डों ने उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया था।
ऐसे विकट समय में कांग्रेस के नेताओं ने सबसे सीनियर और अनुभवी प्रणब मुख़र्जी पर भरोसा न करके राजीव गांधी पर भरोसा किया और 40 वर्ष की उम्र में उनको ज्यादा दुखद एवं कष्टकर परिस्थिति में सत्ता की कमान सौंपी गई जब वह 31 अक्टूबर 1984 को अपनी मां की क्रूर हत्या के बाद कांग्रेस अध्यक्ष एवं देश के प्रधानमंत्री बने थे। लेकिन व्यक्तिगत रूप से इतने दु:खी होने के बावजूद उन्होंने संतुलन, मर्यादा एवं संयम के साथ राष्ट्रीय जिम्मेदारी का अच्छे से निर्वहन किया।

महीने भर के लंबे चुनाव अभियान के दौरान श्री गांधी ने पृथ्वी की परिधि के डेढ़ गुना के बराबर दूरी की यात्रा करते हुए देश के लगभग सभी भागों में जाकर 250 से अधिक सभाएं कीं एवं लाखों लोगों से आमने-सामने मिले।

स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच एवं निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे और जैसा कि वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता को बनाये रखने के उद्देश्य के अलावा उनके अन्य प्रमुख उद्देश्यों में से एक है – इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण और जिस सपने को पूरा करने में पूरा सहयोग किया मोबाइल और आईटी के क्षेत्र में भारत को आत्म निर्भर ही नहीं दुनिया में श्रेष्ट बनाया ? लेकिन श्रीलंका में जाफना और प्रभाकरण तथा लिट्टे के विषय में गलत नीतिया बना कर और लिट्टे के विरुद्ध श्रीलंका का साथ देकर अपनी जान गवां दी ?

कांग्रेस और राजीव गांधी से बगावत करके विश्वनाथ प्रताप सिंह 2/12/89 से 10/1/90 तक प्रधान मंत्री रहे उनका कार्यकाल विवादों से भरा रहा मंडल और कमंडल के बिच उनके विरुद्ध एक बड़ा आंदोलन भी हुआ , वह भी बहुत कष्टमय जीवन जी कर मृत्यु को प्राप्त हुए थे ?

उसके बाद 21/5/1991 सेलेकर 16/5/96 को छोड़ कर अस्थिर सरकारों का दौर रहा जिस कारण भारत की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई थी ? जब 21 मई 1991 को नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री बने तब भारत में अर्थ व्यवस्था में सुधर के लिए बहुत काम हुआ जिसका भार वित्तमंत्री मनमोहन सिंह के कंधो पर था जो एक हद तक सफल भी रहे लेकिन 6 दिसंबर 1992 के बाबरी विध्वंस का कलंक भी उनके सर ही रहा ?

१९९६ के चुनावों के बाद दो साल तक राजनैतिक उथल पुथल का वक्त रहा, जिसमें कई गठबंधन सरकारें आई और गई। १९९६ में भाजपा ने केवल १३ दिन के लिये सरकार बनाई, जो समर्थन ना मिलने के कारण गिर गई। उसके बाद दो संयुक्त मोर्चे की सरकारें आई जो कुछ लंबे वक्त तक चली। ये सरकारें कॉंग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी थीं। १९९८ के चुनावों के बाद भाजपा एक सफल गठबंधन बनाने में सफल रही। भाजपा के अटल बिहारी वजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग, या एनडीए) नाम के इस गठबंधन की सरकार पहली ऐसी सरकार बनी जिसने अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा किय। लेकिन श्री अटल बिहारी जी का कार्यकाल भी अपवादों से परे नहीं रहा। भारतीय परमाणु आयोग ने पोखरण में अपना पहला भूमिगत परिक्षण १८ मई १९७४ को किया था। हलाकि उस समय भारत सरकार ने घोषणा की थी कि भारत का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कार्यो के लिये होगा और यह परीक्षण भारत को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिये किया गया है। बाद में ११ और १३ मई १९९८ को पाँच और भूमिगत परमाणु परीक्षण किये और भारत ने स्वयं को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित कर दिया। इस परीक्षण के प्रतिक्रिया स्वरुप पाकिस्तान ने भी इसके तुरंत बाद २८ मई १९९८ को परमाणु परीक्षण किये। पाकिस्तान को स्वयं को परमाणु शक्ति से संपन्न राष्ट्र घोषित करने के बाद उस समय निंदा झेलनी पड़ी ?
विवादस्पद लाहोर की बस यात्रा , आगरा समिट और कारगिल युद्ध विवादों से भरा रहाआईसी 814 इंडियन एयर लाइन के विमान का नेपाल से अपहरण और फिर 3 खूंख्वार आतंकवादियों को विमान अपहरण के बदले में तत्कालीन विदेश मंत्री श्री जसवंत सिंह द्वारा कांधार तक पहुँचाना किसी अनुभवहीन सरकार के काम के रूप में जाना जायेगा । कारगिल युद्ध को सिमित क्षेत्र में ही लड़ना बहुत बड़ी संख्या में फौजी जवान हताहत हुए एवं घायल हुए? इसी समय कारगिल के सहीदो के लिए ख़रीदे गए ताबूतों में घोटाले का सच सामने आया तत्कालीन डिफेन्स मिनिस्टर जार्ज फर्नाडिस की भूमिका संदेह में रही आज यह तीनो ही सम्माननीय व्यक्ति इस स्थिति में नहीं हैं की अपने सच को जनता को बता सके ?

अंतोगत्वा 2004 के चुनावों में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, पर कॉँग्रेस सबसे बडी पार्टी बनके उभरी, और इसने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग, या यूपीए) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन ने वामपंथी और गैर-भाजपा सांसदों के सहयोग से मनमोहन सिँह के नेतृत्व में पाँच साल तक शासन चलाया। २००९ के चुनावों में यूपीए और अधिक सीटें जीता जिसके कारण यह साम्यवादी (कॉम्युनिस्ट) दलों के बाहरी सहयोग के बिना ही सरकार बनाने में कामयाब रहा। इसी साल मनमोहन सिँह जवाहरलाल नेहरू के बाद् ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हे दो लगातार कार्यकाल के लिये प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ।लेकिन गठबंधन सरकार घटक दलों द्वारा की गई अनियमितता के कारण 2जी और सीएजी द्वारा कथित कोयला घोटाला का रहस्योद्घाटन फिर CWG यानि कमान वेल्थ खेल में कलमाड़ी द्वारा की गई धोखाधड़ी की दास्ताँ UPA 2 के लिए घातक साबित हुई और 2014 के चुनावों में १९८४ के बाद पहली बार किसी राजनैतिक पार्टी की बहुमत की सरकार अस्तित्व में आई? प्रधान मंत्री श्री मोदी बने जिन्होंने ने अपने धुआंधार प्रचार के कारण जनता से बहुत से ऐसे वायदे किये हैं जिनको वह चाह कर भी अपने पूरे जीवन काल में कभी पूरा नहीं कर सकतें ? वैसे भी खबरों के अनुसार वह जिस दक्षिण पंथी राजनितिक पार्टी को रिप्रेजेंट करते हैं उसका झुकाव हिंदुत्व की ओर अधिक है तथा पार्टी का कंट्रोल कथित रूप से सांस्कृतिक संघटन के हैथों में होने के आरोप लगते रहते है ? यानि पॉर्टी की ड्यूअल मेम्बरशिप है ।
वैसे भी मोदी जी पर 2002 के गुजरात दंगों का दाग कभी नहीं छूट सकता क्योंकि संविधान के अनुसार राज्य के मुख्य मंत्री का कर्तव्य होता है की राज्य के सभी निवासियों की जान माल की सुरक्षा करना परंतु गोधरा रेल कांड के बाद जिस प्रकार से गुलबर्गा सोसाइटी में नर संहार हुआ और जिस प्रकार मोदी केबिनेट के मंत्रियों तक को सजा हुई अपने आपमें सब घटना क्रम का खुलासा कर देता है। इन बातो का जवाब जनता कब मांगेगी या जवाब देना कब जरुरी होगा यह भविष्य के गर्भ में है ?
लेकिन हम तो मांग करते हैं की 27 महीने तक घोषणाएं करते बीत गया है अब कुछ नजर भी आना चाहिए । वैसे भी गाय ने बहुत गोबर कर दिया है अब उसको समेटने की बारी है ? केवल यह कह देने से काम नहीं चलेगा कि मेरे दलितों को न मारो मुझे गोली मार दो । उनका यह कथन पलायन की ओर इशारा करता है ? इसलिए हम तो यही कहते हैं कि अपने पूर्वर्ती प्रधान मंत्रियों की गलतियों से सबक लेते हुए जन तंत्र की रक्षा और संरक्षण का कम करे और देश को बुलंदियों पर लेकर जाएँ ? राजनीती प्रधान मंत्री बनाने तक ठीक थी ? भारत जैसे देश का प्रधान मंत्री बनना सबके भाग्य में नहीं है और न ही ये जीवन ही दोबारा मिलता है ? इतिश्री

एस. पी. सिंह, मेरठ ।



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amitshashwat के द्वारा
August 15, 2016

maanyvar , prdhanmantri ke saammarthy evn saflta ko dabang shabd se nihit karna uchit nahi prtit ho raha mujhe . kshmaa chahta hun. aasha hai anytha n lenge. saadar .


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